कैसे हुआ पृथ्वी से डायनासोर का अंत ?

6000 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर अनेक विशालकाय जीव का बसेरा था। इन जीवों में डायनासोर नाम का एक विशालकाय जीव भी था। इस लेख में हम यहां जानेंगे कि पृथ्वी पर से किस तरह डायनासोर का अंत हुआ।

डायनासोर का अंत किस तरह से हुआ यह जानने से पहले हमें उल्का पिंड के बारे में जानना होगा-

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उल्का पिंड

हमारे सौरमंडल में अनेक ग्रह है हमारे सौरमंडल का मुखिया सूर्य है जिस के सबसे नजदीक का ग्रह बुध है इसके बाद शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण है।

मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच अनेक छोटे-छोटे ग्रह हैं जो आपस में टकराते रहते हैं, कुछ ग्रह मंगल के गुरुत्वाकर्षण के कारण मंगल की तरफ आकर्षित होते हैं लेकिन मंगल ग्रह जैसा कि हम सब जानते हैं सूर्य की परिक्रमा करता है तो वहां अपने स्थान से हट जाता है।

इसकी वजह से कुछ ग्रह मंगल पर गिर जाते हैं और कुछ ग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी पर आते हैं।पृथ्वी पर आकर गिरने वाले इन्हीं छुद्र ग्रहों को उल्का पिंड कहा जाता हैं।

यहां उल्का पिंड पृथ्वी पर रोजाना गिरते रहते हैं इन उल्का पिंडों से पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्य और जीव जंतुओं की रक्षा वायुमंडल मैं स्थित हवाएं करती है।

वायुमंडल में उपस्थित हवाएं किस तरह से हमारे लिए सुरक्षा कवच का काम करती है।

जब छुद्र ग्रह पृथ्वी की ओर आते हैं तो वायुमंडल में  स्थित हवाएं इन छुद्र ग्रहों के ऊपर बहुत ज्यादा दबाव लगाती है जिसकी वजह से घर्षण के कारण छुद्र ग्रह जलने लगते हैं और वहां पृथ्वी के वायुमंडल में ही समाप्त हो जाते हैं। इन छुद्र  ग्रहों की गति बहुत तेज होती है जिसके कारण इनका तापमान 15 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है।

लेकिन कुछ क्षुद्र ग्रहों का आकार कितना बड़ा होता है कि वह पूरे जले बिना ही पृथ्वी पर आकर गिर जाते हैं जिसके कारण वहां जिस जगह पर गिरते हैं वहां भीषण तबाही लेकर आते हैं।उल्का पिंड के गिरने के कारण ही महाराष्ट्र में लोनार झील का निर्माण हुआ है।

किस तरह से हुआ पृथ्वी से डायनासोर का अंत

आज से 6 करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर डायनासोर का राज था अगर डायनासोर का अंत नहीं होता तो पृथ्वी पर इंसान का जन्म नहीं होता डायनासोर का अंत का इजिप्टा  नामक छुद्र ग्रह के गिरने के कारण हुआ।

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इजिप्टा नामक उल्का पिंड वर्तमान समय में मेक्सिको नामक खाड़ी में गिरा था यह पृथ्वी पर जैसे ही गिरा इसने पृथ्वी की पूरी रूपरेखा ही बदल दी। इस उल्कापिंड के गिरने से 20 हाइड्रोजन बम के धमाके के बराबर धमाका हुआ। 

इस धमाके के कारण पृथ्वी की ऊपरी परत पर जैसे ही यहां उल्कापिंड टकराया इसके कई टुकड़े हुए जो पृथ्वी के वायुमंडल में इधर-उधर फैल गए तथा उन का तापमान अधिक होने के कारण उड़ने वाले डायनासोर हवा में ही मर गए इस धमाके के कारण पृथ्वी का तापमान 200 डिग्री सेल्सियस तक हो गया जिसके कारण पृथ्वी का अधिकांश भाग बंजर हो गया, इस जगह के सारे डायनासोर मारे गए।

इतने भीषण धमाके के बाद पृथ्वी में काफी हलचल होने लगी जिसके चलते पृथ्वी पर भूकंप, सुनामी, और ज्वालामुखी फटने से अनेक प्रकार की गैस से निकलने लगी।

उल्का पिंडों के पृथ्वी पर टकराने से बहुत अधिक तीव्रता का भूकंप आया जो अभी तक का सबसे ज्यादा तीव्रता का भूकंप था जिसके कारण बड़े-बड़े जीव पृथ्वी के नीचे दबकर मर गए। भूकंप की वजह से सुनामी भी आई जिसके चलते समुद्र का पानी पृथ्वी पर बहुत मात्रा में आ गया इसके वजह से भी बहुत सारे जीव और डायनासोर मारे गए।

इस उल्कापिंड के पृथ्वी पर गिरने की वजह से पृथ्वी पर इतना ज्यादा दबाव बना जिसके कारण ज्वालामुखी भी फटने लगे उनमें से अनेक प्रकार की विषैली गैस निकलने लगी जिसकी वजह से भी कहीं डायनासोर मारे गए। उसके बाद जो जीव जंतु बज गए थे वहां भी भुखमरी का शिकार हो गए और मारे गए क्योंकि इतनी बड़ी तबाही के बाद पृथ्वी पर खाने के लिये कुछ भी नहीं बचा था। और इसी इजिप्टा नाम के छुद्र ग्रह  के कारण  पृथ्वी पर से डायनासोर के साथ उस समय के अनके प्रकार का अंत हो गया।

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