डॉ बालासाहेब विखे पाटिल का जीवन परीचय

डॉ.बालासाहेब विखे पाटिल
डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल जिनकी आत्मकथा “देह वेचावा कारणी” (जो कि मराठी भाषा में लिखी गई है) का विमोचन और प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी का नाम बदलकर ‘लोकनेते डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए किया।

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डॉ बालासाहेब विखे पाटिल जिनका नाम एकनाथराव भी है

डॉ बालासाहेब विखे पाटिल का जन्म महाराष्ट्र के  अहमदनगर जिले के अस्टागांव में 10 अप्रैल 1932 को हुआ। इनके पिता विट्ठलराव विखे पाटिल महाराष्ट्र के प्रमुख नेता में से थे। जिन्होंने प्रवरनगर में एशिया की पहली सहकारी चीनी फैक्ट्री शुरू की थी।

डॉ.बालासाहेब पाटिल जी का विवाह सिंधु ताई के साथ हुआ था जिनसे इनके 3 बेटे अशोक विखे पाटिल, राधाकृष्ण विखे पाटिल और राजेंद्र विखे पाटिल और 2 बेटियां हैं।

डॉ बालासाहेब पाटिल प्रारम्भ में राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के सदस्य थे। वह शिवसेना में भी रहें, बाद में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 
डॉ बालासाहेब विखे पाटिल सात बार सांसद बने और वर्ष 1999 से 2001 तक अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय राज्य वित्त मंत्री भी रहे।
केंद्रीय कैबिनेट में भारी उद्योग मंत्री भी रहे ।

पुरस्कार व सम्मान

डॉ बालासाहेब विखे पाटिल जी को 31 मार्च 2010 को सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण प्रदान किया गया।

वर्ष 2013 मे महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी द्वारा  डॉक्टर ऑफ़ साइंस में अवार्ड प्रदान किया गया।

डॉ.बालासाहेब विखे पाटिल जी का 30 दिसंबर, 2016 को 84 वर्ष की आयु में लोनी, प्रवरनगर, जिला अहमदनगर में देहांत हो गया।

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