सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत का बिस्मार्क कहा जाता है ?

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परीचय

सरदार वल्लभ भाई पटेल स्वभाव से निर्भय, वीर तथा दृढ़ निश्चय पूर्वक जिन्होंने देश को अपने से भी ऊपर रखा और एक भारत श्रेष्ठ भारत का निर्माण किया।
ऐसे भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल को शत शत नमन।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 बंबई (मुंबई) प्रेसिडेंसी के नडियाद गांव में एक किसान परिवार में हुआ।  सरदार पटेल के पिता झवेरभाई पटेल सन् 1857 के विद्रोह के समय झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की फौज में भर्ती होकर अंग्रेजों से युद्ध लड़ चुके थे।
सरदार पटेल की माता का नाम लाड़ बाई था।

सरदार वल्लभ भाई पटेल अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। इनके बड़े भाई विट्ठल भाई पटेल आचार्य और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के देश विदेश में प्रचारक व प्रवर्तक थे।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नडियाद में प्राप्त की बाद में मैट्रिक के लिए वहां बड़ौदा गए परंतु कुछ कारणों के चलते फिर से नडियाद आकर नडियाद हाय स्कूल से वर्ष 1897 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।
वर्ष 1910 में बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड रवाना हुए। 13 फरवरी 1913 को पढ़ाई पूर्ण कर वापस बंबई (मुंबई) लौट आए तथा 1919 तक अहमदाबाद में रहकर वकालत की।      
सरदार वल्लभ भाई पटेल का विवाह 18 वर्ष की आयु में झवेर बा के साथ हुआ जिनसे अप्रैल 1903 में इनकी एक पुत्री मणिबेन व 28 नवंबर 1905 को पुत्र दह्याभाई का जन्म हुआ। 11 जनवरी 1909 को बंबई के अस्पताल में शल्य चिकित्सा के दौरान झवेर बा का निधन हो गया। 

चाहे बेगारी बंद करवाने की बात हो या खेड़ा के किसानों पर लगान वसूल करने के नाम पर हो रहे अत्याचारों की सरदार पटेल हमेशा सबकी समस्याओं में सबके साथ खड़े रहे।

खेड़ा का आंदोलन


अप्रैल 1918 को खेड़ा तालुका में सूखे के कारण फसल न होने पर भी किसानों से सरकार द्वारा लगान वसूलने के पर सरदार पटेल, महात्मा गांधी व अन्य लोगों ने करबंदी सत्याग्रह प्रारंभ कर दिया। जिसके परिणाम स्वरूप किसान भी सरकार से लड़ने के लिए तैयार हो गए और अंत में सरकार द्वारा किसानों को कर में राहत दी गई।

बारदोली का सत्याग्रह


वर्ष 1928 प्रांतीय सरकार द्वारा किसानों पर कर में जब 30% तक की वृद्धि कर दी गई तो सरदार पटेल ने अपने नेतृत्व में किसानों को एकजुट कर आंदोलन प्रारंभ कर दिया। जिसको कुचलने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने धर्म, जाति, फूट डालो, धमकाने जैसे कहीं हथकंडे अपनाएं परंतु किसानों की आवाज को दबाने में नाकाम रही। सरकार को अंत में विवश होकर किसानों की मांग को मानना पड़ा तथा 22 प्रतिशत लगान वृद्धि को गलत ठहराते हुए 6.03 प्रतिशत लगान ही लगाया गया।
जिन किसानों की चल-अचल संपत्ति कुर्क की गई थी, वहां भी लौटा दी गई।
सरदार वल्लभभाई पटेल की मांग पर आंदोलन के दौरान आंदोलन के समर्थन में आने पर जिन पटेलों व तलाटियों ने अपनी नौकरी त्याग दी थी उन्हें पुनः नौकरी पर रख लिया गया।

बारदोली सत्याग्रह के बाद सरदार पटेल के नाम की प्रसिद्धि पूरे राष्ट्र में पहले से ज्यादा बढ़ फेल गई थी।
इसी आंदोलन के सफल होने पर बारदोली की महिलाओं द्वारा वल्लभभाई पटेल को “सरदार” की उपाधि प्रदान की गई।

सरदार वल्लभ भाई पटेल 
2 सितंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना मंत्रिमंडल बनाया जिसमें पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित 12 सदस्य थे। सरदार पटेल भी गृहमंत्री बनाए गए।

मई 1946 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया उस समय कांग्रेस की 15 प्रांतीय कमेटियों में से 12 ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के पक्ष में अपना मत दिया था।
परन्तु महात्मा गांधी चाहते थे कि पंडित जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने।
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने महात्मा गांधी को अपने गुरु का दर्जा दिया था इसलिए आज्ञानुसार उन्होंने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से अपना नाम हटा लिया और 24 अगस्त 1947 को सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत का उप प्रधानमंत्री व गृहमंत्री बनाया गया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विभाजन के बाद दिल्ली में भड़के दंगे हो, शरणार्थियों की समस्याओं हो या देशी राज्यों का एकीकरण करके एक राष्ट्र का निर्माण करने का कार्य हो सब को बखूबी पूरी दृढ़ता के साथ निस्वार्थ और त्यागभाव से पूरा किया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने राष्ट्र के निर्माण के लिये तीन प्रकार से देसी रियासतों का विलय किया।
1 कुछ रियासतों को मिला एक राज्य बना कर।
2 कुछ राज्यों को भारत सरकार के अधिकार में रखकर। 3 कुछ राज्यों को आपस में मिलाकर उनका संघ      बनाकर।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 13 नवंबर 1947 को सोमनाथ मंदिर के दौरे के दौरान मंदिर की स्थिति को देखकर मंदिर के पुनः निर्माण कराने का निश्चय किया तथा जनधन के सहयोग से मंदिर का पुनः निर्माण करवाया।
11 मई 1952 को तत्कालीन राष्ट्रपति की मौजूदगी में  मंदिर की मूर्ति प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

15 दिसंबर 1950 को सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्वर्गवास प्रातः काल में 9:37 पर हो गया।

सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत का बिस्मार्क कहा जाता है ?

सरदार वल्लभ भाई पटेल  को भारत का बिस्मार्क कहा जाता है क्योंकि जिस तरह से ‘ओटो ऐडुअर्ड लिओपोल्ड बिस्मार्क’ ने जर्मन भाषी अनेक राज्यों का एकीकरण करके एक जर्मन साम्राज्य को स्थापित किया था ठीक उसी तरह  सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपनी कूटनीतिज्ञता और दृढ़ता से भारत की सभी छोटी-बड़ी रियासतों को भारत सरकार के अधीन कर एक सुदृढ़ राष्ट्र का रूप दिया था।

सरदार वल्लभ भाई पटेल द्वारा भारत की 562 छोटी बड़ी रियासतों को एक कर राष्ट्रीय एकता को एक मजबूत करने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल को लोह पुरुष की उपाधि दी गई।

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्म तिथि 31 अक्टूबर को वर्ष 2014 से राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल को वर्ष 1991 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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