मध्य प्रदेश के 10 प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जानकारियां famous temple in madhya pradesh

Table of Contents

1.मध्य प्रदेश के उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर-famous temple in madhya pradesh

भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में स्थित है। पुराणों महाभारत कथा कालिदास जैसे महा कवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू भव्य और दक्षिण मुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यंत  महानता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है ऐसी मान्यता है। इल्तुतमिश के द्वारा इस प्राचीन मंदिर का विध्वंस किए जाने के बाद से जो भी राजा यहां का शासक रहा उसने इस मंदिर के जीर्णोद्धार और पूर्णा निर्माण पर विशेष ध्यान दिया।

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12 ज्योतिर्लिंगों में से 1 ज्योतिर्लिंग होने के कारण उज्जैन में 12 वर्षों के अंतराल में सिंहस्थ मेले का आयोजन होता है। मंदिर एक परकोटे के भीतर स्थित है।गर्भ ग्रह तक पहुंचने के लिए एक सीढ़ीदार रास्ता है जिसमें शिवलिंग स्थित है।महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास में हर सोमवार को इस मंदिर में अपार भीड़ होती है।मंदिर में एक छोटा सा जल स्त्रोत है जिसे कोटि तीर्थ कहा जाता है। महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्था के लिए एक प्रशासनिक समिति का गठन किया गया है के निर्देशन में यहां की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है। हाल ही में इसके 118 शिखरों पर 16 किलो सोने की परत चढ़ाई गई है अब मंदिर में दान के लिए इंटरनेट सुविधा भी चालू की गई है।

2. मध्यप्रदेश का ओमकारेश्वर मंदिर-famous temple in madhya pradesh

ओमकारेश्वर एक हिंदू मंदिर है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यहां नर्मदा नदी के बीच मांधाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर है। यहां ओम शब्द की उत्पत्ति श्री ब्रह्मा जी के मुख से हुई है। ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग ओमकार अथवा ओम का आकार लिए हुए हैं इसलिए इसे ओमकारेश्वर नाम से पुकारा जाता है। तीर्थयात्री सभी तीर्थों का जल लाकर ओमकारेश्वर में अर्पित करते हैं, तभी सारे तीर्थ पूर्ण माने जाते हैं।

अन्यथा वे अधूरे ही माने जाते हैंओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर एक पांच मंजिला इमारत है।जिसके प्रथम मंजिल पर भगवान महाकालेश्वर का मंदिर है तीसरी मंजिल पर सिद्धनाथ महादेव चौथी मंजिल पर गुप्तेश्वर महादेव और पांचवी मंजिल पर राजेश्वर महादेव का मंदिर है।ओमकारेश्वर मंदिर के पुजारी के अनुसार माना जाता है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में यहां एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जहां महादेव शयन करने आते हैं। भगवान शिव प्रतिदिन तीनों लोकों में भ्रमण के पश्चात यहां आकर विश्राम करते हैं

3. मध्यप्रदेश के इंदौर का खजराना गणेश मंदिर-famous temple in madhya pradesh

1735 में जब खजराना गणेश की मूर्ति की स्थापना हुई थी तब यहां ढाई फीट लंबी और सवा 2 फीट चौड़ी थी। इसके साथ रिद्धि सिद्धि की प्रतिमा भी थी। अब भगवान गणेश की प्रतिमा करीब साडे 4 फीट ऊंची और 5 फीट चौड़ी हो गई है। मंदिर के पुजारी के मुताबिक हर साल भगवान की मूर्ति करीब 1 सेंटीमीटर बढ़ जाती है। पिछले 285 वर्षों में इसका आकार बढ़कर दोगुना हो गया है।

मूर्ति पर रोज सवा किलो घी में आधा किलो सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाया जाता है।खजराना गणेश मंदिर का निर्माण 1735 में तत्कालीन होलकर वंश के शासकों अहिल्याबाई ने करवाया था। उस समय के पुजारी मंगल भट्ट को सपना आया था कि यहां पर भगवान गणेश की मूर्ति जमीन में दबी हुई है पुजारी ने दरबार में जाकर सपने की बात अहिल्याबाई को बताई जिसके बाद उन्होंने सेना भेजकर खुदाई करवाई।

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मूर्ति निकलने के लिए खोदी गई जगह को कुंड का रूप दिया गया अब यहां कुंड मंदिर के गेट पर ही है।इस मंदिर से मान्यता जोड़ी है कि गणेश जी की मूर्ति की पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से मनोकामना पूर्ण होती है मनोकामना पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर आकर सीधा स्वास्तिक बनाना होता है। एक अन्य मान्यता यह भी है कि मंदिर की तीन परिक्रमा लगाते हुए धागा बांधने से भी इच्छा पूर्ति होती है।

4. मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित चतुर्भुज मंदिर-famous temple in madhya pradesh

यहां मंदिर जट करा ग्राम से लगभग आधा किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहां विष्णु मंदिर निर्धार प्रकार का है। इसमें अर्ध मंडप, मंडप, संकरण अंतराल के साथ-साथ गर्भ ग्रह है।इस मंदिर का निर्माण कल ज्वारी तथा दुलादेव मंदिर के निर्माण काल के मध्य माना जाता है। बलुआ पत्थर से निर्मित खजुराहो का यहां एकमात्र ऐसा मन जिसमें मिथुन प्रतिमाओं का सर्वथा अभाव दिखाई देता है। सामान्य रूप से इस मंदिर की शिल्प कला अवंतिका संकेत करती है।

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यहां की पशु की प्रतिमाएं एवं आकृतियां अप परिष्कृत तथा अरुचिकर है।चतुर्भुज मंदिर के द्वार के शार्दुल सर्किल प्रकार के हैं। इसमें कुछ सुर सुंदरियां अश्वनी ही छोड़ दी गई है। मंदिर की अधिकांश अप्सराएं और कुछ देव डोरी मेकला धारण किए हुए अंकित किए गए हैं तथा मंदिर की रचनाओं के अंदर स्तंभ वर्तुलाकर बनाए गए हैं।

5. मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर-famous temple in madhya pradesh

चौसठ योगिनी मंदिर मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित देवी का एक मंदिर है। इस मंदिर को त्रिपुरी राजघराने के महाराज युवराज प्रथम ने बनवाया था।

6. मध्यप्रदेश के नलखेड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर-famous temple in madhya pradesh

माता बगलामुखी का यहां मंदिर मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के नलखेड़ा कस्बे में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। यहां मंदिर तीन मुख्य वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी को समर्पित है। मान्यता है कि द्वापर युग से चला आ रहा है यहां मंदिर अत्यंत चमत्कारीक भी है।कहते हैं कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय के उद्देश्य से भगवान कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने की थी।मान्यता यह भी है कि यहां के बगलामुखी प्रतिभा स्वयंभू है।

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प्राचीन तंत्र ग्रंथों में 10 महाविद्याओं का उल्लेख है जिनमें से एक है बगलामुखी।सड़क मार्ग द्वारा इंदौर से लगभग 165 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नलखेड़ा पहुंचने के लिए देवासिया उज्जैन के रास्ते से जाने के लिए बस और टैक्सी उपलब्ध है। वायु मार्ग से पहुंचने हेतु नलखेड़ा के निकटतम इंदौर का विमानक्षेत्र है। रेल मार्ग द्वारा इंदौर से 30 किलोमीटर पर स्थित देवासिया लगभग 60 किलोमीटर मक्सी पहुंचकर भी आगर मालवा जिले के कस्बे नलखेड़ा पहुंच सकते हैं

7. मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित लक्ष्मण मंदिर-famous temple in madhya pradesh

पंचायतन शैली का यहां संघार प्रसाद, विष्णु को समर्पित है। इसके ठीक सामने विष्णु के वाहन गरुड़ के लिए एक मंदिर था। गरुड़ की प्रतिमा अब लुप्त हो गई है। वर्तमान में छोटे से मंदिर को देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। लक्ष्मण मंदिर से प्राप्त एक अभिलेख से पता चलता है कि चंदेल वंश की सातवीं पीढ़ी में हुए यशोवर्मन ने अपनी मृत्यु से पहले खजुराहो में बैकुंठ विष्णु का एक भव्य मंदिर बनवाया था।

8. मध्यप्रदेश के दतिया शहर में स्थित पितांबरा पीठ-famous temple in madhya pradesh

श्री पितांबरा पीठ मध्य प्रदेश राज्य के दतिया शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर परिसर है। यहां कई पौराणिक कथाओं के साथ-साथ वास्तविक जीवन में लोगों की तपस्थली है। यहां मुख्य रूप से शक्ति का आराधना स्थल है।पितांबरा पीठ की स्थापना एक सिद्ध संत जी ने लोकस्वामी जी महाराज के कर पुकारते थे ने 1935 में दतिया के राजा शत्रु जीत सिंह बुंदेला सहयोग से की थी।

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तभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था।श्री पितांबरा पीठ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जो 1920 के दशक में श्री स्वामी जी द्वारा स्थापित किया गया था। उन्होंने आश्रम के भीतर धूमावती देवी के मंदिर की भी स्थापना की थी, जो कि देश भर में एकमात्र है।

धूमावती और बगलामुखी 10 महाविद्याओं में से दो है। पितांबरा पीठ मंदिर के साथ एक ऐतिहासिक शक्ति भी जुड़ा हुआ है।सन 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया था उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। भारत के मित्र देशों रूस तथा मिश्र ने भी सहयोग देने से मना कर दिया था। तभी किसी योगी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू से स्वामी महाराज से मिलने को कहा।स्वामी महाराज ने राष्ट्रीय हित में 51 कुंडी महायज्ञ करने की बात कही।

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यज्ञ के नौवें दिन जब यज्ञ का समापन होने वाला था उसी समय संयुक्त राष्ट्र संघ का नेहरू जी को संदेश मिला कि चीन ने आक्रमण रोक दिया है। इसी प्रकार सन 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी यहां गुप्त रूप से पुनः साधना एवं यज्ञ कराए गए थे। पीठ मध्य प्रदेश के दतिया शहर में स्थित है,सबसे निकटतम हवाई अड्डे में ग्वालियर लगभग 75 किलोमीटर और झांसी 29 किलोमीटर दूर स्थित है। आश्रम दतिया रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर दूर है

9. मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित बिजासन माता मंदिर-famous temple in madhya pradesh

बिजासन माता मंदिर मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित देवी दुर्गा का मंदिर है। यहां एक पहाड़ी पर स्थित है और इंदौर के देवी अहिल्या बाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमान क्षेत्र के समीप स्थित है।

10. मध्यप्रदेश के खजुराहो में स्थित ब्रह्मा मंदिर-famous temple in madhya pradesh

ब्रह्मा का मंदिर खजुराहो के सागर के किनारे तथा चौसठ योगिनी से पूर्व की ओर स्थित है यह मंदिर वैष्णव धर्म से संबंधित है। इसका दृश्य अपने आप में बेमिसाल है।उसे देखकर ऐसा लगता है कि कोई कलाकार सागर के किनारे बैठा-बैठा लहरों  के साथ ही सागर की गहराई में डूब जाना चाहता है। मंदिर में विष्णु मूर्ति स्थापित है, पर श्रद्धालुओं ने ब्रह्मा समझकर इनका ही मंदिर कहना प्रारंभ कर दिया है।वर्तमान में इस मंदिर में चतुर्मुख शिवलिंग विराजमान है। ब्रह्मा का बाहरी भाग स्वास्तिक के आकार का है। प्रवेश द्वार के सिरदल मैं त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, की स्थूल मूर्तियां है।

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