RJ RAGHAV- 60 सेंकड़ के विड़ीयो से वायरल हुए RJ RAGHAV की कहानी उन्ही की जुबानी

इस लेख में, हम RJ RAGHAV रेडियो जॉकी के बारे में जानेंगे जो हैलो एफएम चैनल पर काम करते हैं। वह “RJ RAGHAV के शो” के कारण प्रसिद्ध हैं। उन्होंने हम सभी के लिए जीवन में एक मंत्र दिया है “खुश रहो जियो और जीना दो” और RJ RAGHAV

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को बेस्ट ईवनिंग जॉक अवार्ड से भी नवाज़ा गया। RJ RAGHAV ने रेड़ियो जॉकी के रूप में 94.3 माय एफएम में 4 साल से अधिक समय बिताया है।

RJ RAGHAV

हेलो दोस्तों मेरा नाम है राघव द्विवेदी और आप आप सब मुझे RJ RAGHAV के नाम से जानते हैं। रेडियो में करियर को शुरू किया है सिर्फ दस साल हुए मुझे और अभी तो बहुत आगे जाना है मेरे घर में हम चार लोग मम्मी पापा दीदी और में एक दिन आज से दस साल पहले चलते हैं।

एक दिन पता चलते हमें ग्वालियर में जब हम किराए पर रह रहे थे की मेरे फादर मिसिंग हैं। मतलब उनका कुछ पता नहीं चल रहा है। फोन नहीं लग रहा है।

मिडिल क्लास फैमिली में क्या होता जब फादर गायब होते न तो आपको अपनी 80% चीजें पता नहीं होती है बीमा है कि नहीं है पैसे हैं कि नहीं है किससे उधारी लेनी है कुछ पता नहीं होता। फिर आपको सिर्फ कुछ रास्ते नजर आते हैं। वैसे हमारे साथ हुआ सर्चिंग चालू हुई फादर की लेकिन कुछ पता नहीं चला। हम लोग जिस आश्रम से जुड़े हुए थे वहां पर भी बताया। वहां भी सर्चिंग चालू हुई। कुछ पता नहीं चला।

बैक टू पवेलियन घर बैठे और मैं दीदी और मम्मी तब हमारे एकाउंट भी नहीं थे। दस साल पहले की बात कर रहा हूॅ मैं काश तब जनधन योजना चली होती तो कम से कम में एकाउंट तो खुल जाते नहीं थे। हमारे पूरे घर में जब हमने सारे रुपये इकट्ठे किए थे तो सिर्फ दो हजार थे तो ग्वालियर शहर में जहां हम किराए से रहते थे।

तीन महीने का किराया देना बाकी है। आप छोटी सी जगह में काम कर रहे हैं। और आपके पूरे घर में सिर्फ 2000 रुपए है। अब आप सोच लो कि आपके पास रास्ते क्या हैं। अगर मेरी दीदी की एजुकेशन में थोड़ा और अच्छा फोकस किया होता होता घर में तो शायद कुछ अच्छी सिचुएशन होती लेकिन नहीं हो पाए। ऐसा कहने में तो बड़ा सिंपल लगता है कि मन हो रहा हो तो सुसाइड कर लें।

आपको शायद थोड़ा मजाक भी लग रहा होगा की RJ RAGHAV कभी ऐसा सोच सकता है क्या लेकिन आप यकीन मानो ये बात उतनी ही सच है जितना आप और मैं सामने खड़े उस वक्त मेरे पास सिर्फ दो रास्ते थे। मेरे पास सिर्फ ट्रक के सामने आव या फिर ट्रेन के ट्रैक पर आव यह सोच ही रहा था की में रात के 11 बजे के आसपास दीदी एक पेपर पेन लेके पहुंची मेरे पास और बोले अच्छा अगर अपने पास इतने रुपये हैं और उसी वक्त हमारे दूर के मामाजी भी आए उन्होंने कहा कि कुछ पैसे 10 हजार रुपये मैं आपको देता हूं।

अगले महीने मैं नही दे पाउंगा और उसके अगले महीने कोई और भी शायद नहीं दे पाएगा तो ये 10 और 2  दोनो मिला कर 12 हजार रुपये है आप इन्हें कैसे खर्च करोगे यह बहुत कुछ डिसाइड कर देंगा कि आप लाइफ में क्या करोगे। सबसे पहले हमने मकान मालिक का काम निपटाया और ऐसा भी होता है कि जब आप मुसीबत में होते हैं तो ऊपर वाला और थोड़ा कठीन टेस्ट लेता है और थोड़ी मुसीबतें लेता है। मकान मालिक ने तीन महीने का बिजली बिल एक्स्ट्रा जोड़ दिया था।

उस बात से हम जैसे तैसे हम आगे बढ़े। वैसे अब हम मरने वाली बात भूल गए न। ऐसे में भूल गया जब दीदी ने वो हिसाब जोड़ा। बिल्कुल ऐसे ही में मरने वाली बात भूल गया और उसके बाद हम आगे बढ़े। दीदी की टेली में अकाउंट जॉब में जॉब थी टेली किया हुआ उन्होंने  तो 3000 रुपये के आसपास उनको मिलते रहे। मुझे थोड़ा कम मिलते थे और उससे भी ज्यादा वो काट लिया करते थे। लेट आने पर।

 तो काम करते रहे। थोड़े दिन के बाद मुझे एक ऑफर आया। रेडियो में था मैं और मुझे एक और रेडियो का ऑफर आया जो मैंने एक्सेप्ट किया और मैं पहुंचा रायपुर छत्तीसगढ़ की कैपिटल है आप जानते होंगे । तो वहां पर मैंने काम करना शुरू किया। फर्स्ट ईयर मुझे इवनिंग शो होस्ट करने को कहा गया था फर्स्ट ईयर मैंने बेस्ट इवनिंग जॉक गोल्ड अवॉर्ड जीता। फर्स्ट ईयर में

मुझे ज्यादा से ज्यादा ह्यूमर पर फोकस करना था। फनी चीजों पर फनी स्टोरीज लानी थीं मेरे बॉस। दो बातें जो मुझे याद हैं अब उस पहली साल की हुई है कि एक ये कहा था किसी ने की अगर जिसकी नजर रणवीर सिंह पर पड़े अगर एनर्जी के मामले में तुम पर पड़ती तो शायद तुम भी कही पर होते। दूसरी मेरे बॉस ने कहा था कि जिस सिचुएशन में वो ईवनिंग शो और थोड़ा फनी कॉन्टेंट ला रहे हैं वो कमाल् हैं।

दूसरे साल अगेन बेस्ट इवनिंग जोक गोल्ड फिर से जीता और तीसरे साल जीतने से पहले मैं कानपुर आ गया था।कानपुर में मेहनत की अच्छा आप भूल गए न घर में क्या हो रहा।

ऐसे में भूल गया था क्योंकि बिल्कुल जो सपोर्ट मिलना था ना घर से मुझे पापा नहीं हैं मम्मी की तबीयत खराब दीदी अकेली मैनेज कर रही है तो वो दीदी ने न एक बैनर सा लगा दिया कि आपको घर की कोई भी प्रॉब्लम पता ही नहीं चलेगी आप उस काम पर फोकस करो और करते जाओ। तो वहीं हुआ अपन करते गए।

कानपुर में लगभग साढ़े चार साल हुए। अभी जिस छह महीने पहले हमारी फैमिली के पास घर नहीं था मेरे पास तो बस दो हजार रुपए थे हमने अपना नया घर खरीदा है।

आपको पता है दीदी ने ये सब जो सपोर्ट किया मुझे बिना सोशल मीडिया पर कोई भी ज्ञान दिए। आज तक उसने एक लाइन नहीं लिखी है। सोशल मीडिया पर ज्ञान वाली आपको ये करना चाहिए या ये करना चाहिए ऐसा होना चाहिए लंबे लंबे स्टेटस लिखते है न लोग उसने कभी कुछ नहीं लिखा। उसने जो लिखना था वो किया जो वास्तव में जो करना था वो किया सपोर्ट किया मुझे कि मैं घर की प्रॉब्लम को बिल्कुल नजरअंदाज कर दूं।दो ही बातें लाइफ जरूरी है  पहला है कर्म और दूसरी है फैमिली।

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